डॉग-बाइट की बढ़ती घटनाओं और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत अब प्रत्येक अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) और रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (आरआईजी) की 24 घंटे उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को अपने परिसरों को आठ सप्ताह के भीतर आवारा और लावारिस कुत्तों से पूरी तरह मुक्त करना होगा। इसके साथ ही हर अस्पताल में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो डॉग-बाइट से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था और उपचार प्रबंधन की निगरानी करेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव द्वारा राज्यों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि रेबीजरोधी टीके की कमी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी कारण अब एआरवी और आरआईजी का पर्याप्त स्टॉक हर समय बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। अस्पतालों को अपने वैक्सीन स्टॉक की नियमित जानकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी और किसी भी प्रकार की कमी की सूचना 24 घंटे के भीतर साझा करनी होगी।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि देश के कई जिलों में रेबीज वैक्सीन की अनुपलब्धता के मामले सामने आए हैं, जिससे उपचार में देरी और मरीजों की जान को खतरा पैदा हुआ। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने अब राज्यों और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है।
मेडिकल कॉलेजों के लिए अलग निर्देश
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण अस्पतालों के लिए अलग से नोटिस जारी किया है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल परिसर, हॉस्टल, आपातकालीन विभाग और ट्रॉमा कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कुत्तों की आवाजाही पर सख्त रोक लगाई जाए। आयोग ने मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।



