फुटबॉल जगत से इस समय ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे पढ़कर कोई भी हैरान रह जाएगा। कैरेबियाई सागर में बसा छोटा सा द्वीपीय देश कुराकाओ ने इतिहास रचते हुए 2026 फीफा विश्व कप में अपनी जगह बना ली है।
1.56 लाख की मामूली आबादी वाला यह देश अब विश्व कप में खेलने वाला दुनिया का सबसे कम आबादी वाला देश बन गया है।
कुराकाओ, जो क्षेत्रफल में सिर्फ 444 वर्ग किलोमीटर का है और नीदरलैंड्स का हिस्सा माना जाता है, ने 2025 के आंकड़ों के हिसाब से अपनी 156,115 जनसंख्या के साथ यह असंभव लगने वाला लक्ष्य हासिल किया है।
इससे पहले यह अनोखा रिकॉर्ड आइसलैंड के नाम था, जिसने 2018 में करीब 3.5 लाख की आबादी के साथ क्वालीफाई किया था।
और यह तो और भी चौंकाने वाला है—कुराकाओ की आबादी उतनी ही है जितनी दिल्ली के लाजपत नगर जैसे एक व्यस्त मोहल्ले में रहती है। भारत का नोएडा, जिसकी 2025 में अनुमानित आबादी लगभग 9.3 लाख है, कुराकाओ से लगभग छह गुना बड़ा है। लेकिन मैदान पर दम दिखाने में यह छोटा देश किसी से पीछे नहीं रहा।
मैच में रोमांच आखिरी मिनट तक बरकरार
किंग्सटन के नेशनल स्टेडियम में जमैका के खिलाफ निर्णायक मुकाबला 0-0 की बराबरी पर खत्म हुआ।
दूसरे हाफ में जमैका ने जोरदार दबाव बनाया, तीन बार गेंद पोस्ट से टकराई, और इंजरी टाइम में मिली पेनल्टी को VAR ने रद्द कर दिया।
यह फैसला आते ही कुराकाओ के खिलाड़ी खुशी से मैदान में दौड़ पड़े।
कुराकाओ ने क्वालीफायर में एक भी मुकाबला नहीं हारा और ग्रुप बी में 12 अंकों के साथ टॉप पर रहते हुए सीधी जगह बनाई। कोच डिक एडवोकाट पारिवारिक कारणों से मौजूद नहीं थे, फिर भी टीम ने शानदार अनुशासन और टीमवर्क दिखाते हुए इतिहास लिख दिया।
भारत के लिए सबक
एक तरफ 135 करोड़ की आबादी वाला भारत आज तक विश्व कप में क्वालीफाई नहीं कर पाया, वहीं दूसरी तरफ कुराकाओ जैसे छोटे देश ने सीमित संसाधनों और सही रणनीति के दम पर यह मुकाम पा लिया।
यह सफलता भारतीय फुटबॉल के लिए प्रेरणा है कि प्रतिभा और तैयारी किसी भी आकार या जनसंख्या पर निर्भर नहीं करती।
2026 फीफा विश्व कप का ड्रॉ 5 दिसंबर को वॉशिंगटन डी.सी. में होगा। टूर्नामेंट पहली बार 48 टीमों के साथ अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में जून-जुलाई में खेला जाएगा।







