रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि अब आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों को बकाया रकम का भुगतान नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने स्पष्ट कहा कि केवल चालू वित्तीय वर्ष में किए गए इलाज की राशि ही अस्पतालों को दी जाएगी, जबकि पिछले वर्षों की बकाया राशि के लिए किसी भी तरह का भुगतान नहीं होगा।
इस निर्णय से निजी अस्पतालों को बड़ा झटका लग सकता है। अनुमान है कि जनवरी से मार्च 2025 तक अस्पतालों को करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा। अस्पतालों ने इस राशि के भुगतान के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने मार्च 2025 तक का पूरा ऑडिट पूरा कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इस वजह से अब राज्य सरकार के पास कोई भुगतान करने का विकल्प नहीं बचा।
निजी अस्पतालों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में स्वास्थ्य सचिव से मिला था और अपनी चिंताएं रखीं। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) ने भी स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात कर समस्या बताई। हालांकि, विभाग का कहना है कि मार्च 2025 तक सभी लंबित दावों का निपटारा हो चुका है और आगे अब किसी भी तरह का भुगतान संभव नहीं है।
सरकार के इस फैसले से निजी अस्पतालों के संचालन और वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यदि बकाया राशि नहीं मिली तो आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों का इलाज करना मुश्किल हो जाएगा। इससे आम जनता पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका है, जो सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इस योजना पर निर्भर है।



