रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक ही सवाल पर अटकी हुई है — आखिर मंत्रिमंडल विस्तार क्यों बार-बार टल रहा है? सूत्रों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा के कद्दावर नेता पवन साय हैं। संगठन और सत्ता दोनों में उनकी मजबूत पकड़ ने यह साफ कर दिया है कि मंत्रिमंडल का गठन उनकी सहमति के बिना संभव नहीं है।
पवन साय की सहमति पर टिका मंत्रिमंडल विस्तार
खाली पड़े तीन मंत्री पदों को भरने की तैयारी लंबे समय से चल रही है, लेकिन नामों पर अंतिम सहमति नहीं बन पा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पवन साय की कुछ नेताओं को लेकर असहमति है, जिसके चलते विस्तार बार-बार टल रहा है।

सीएम की सक्रियता, लेकिन अंतिम फैसला पवन साय के हाथ में
मुख्यमंत्री ने दिल्ली दौरे के दौरान पार्टी हाईकमान से मुलाकात की और राज्यपाल से भी बैठक की, जिससे विस्तार की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, अंदरखाने की सच्चाई यही है कि जब तक पवन साय हरी झंडी नहीं देंगे, मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होगा।
2047 मिशन से जुड़ा मंत्रिमंडल का चयन
भाजपा संगठन 2047 के मिशन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन करना चाहती है। पवन साय को इस मिशन की रणनीति का मुख्य चेहरा माना जा रहा है, इसलिए उनकी राय को सबसे अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि पूरा मंत्रिमंडल विस्तार उनकी सहमति पर टिका हुआ है।



