कोंडागांव में पहली बारिश में ढहा 29 लाख का पुल, ग्रामीणों का टूटा संपर्क, उठी जांच की मांग

Madhya Bharat Desk
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कोंडागांव। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम धनोरा के वेदी नाला पर बना पुल पहली बारिश में ही ढह गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। 29.19 लाख रुपये की लागत से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा स्वीकृत इस परियोजना के तहत 4.39 लाख रुपये श्रमिकों की मजदूरी और 24.79 लाख रुपये सामग्री पर खर्च होना था।

स्थानीय निवासी रामसिंग मरकाम और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुलिया का निर्माण बिना किसी ठोस निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण के किया गया था। निर्माण में घटिया सामग्री जैसे खराब सीमेंट, कमजोर गिट्टी और रेत का उपयोग हुआ। मरम्मत के नाम पर पुनः निर्माण तो हुआ, लेकिन वह अधूरा और असुरक्षित रहा।

पुल के बहने से रास्ता कीचड़ में तब्दील हो गया है, जिससे धनोरा, पथरापारा और ध्रुवापारा जैसे गांवों के निवासियों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सूचना पटल पर कार्य की शुरुआत और समाप्ति की तिथि तक नहीं लिखी गई, जिससे परियोजना की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मजदूरों को मेहनताना नहीं दिया गया। विभागीय इंजीनियर राजीव सिंह से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इससे प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही से बचने की कोशिश का संदेह गहरा गया है।

ग्रामीणों की मांग: हो निष्पक्ष जांच और पुनर्निर्माण

स्थानीय लोगों ने शासन से अपील की है कि घटिया निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को सजा दी जाए और पुनः गुणवत्ता के साथ नया पुल बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो।

बरसात में टूटा संपर्क, गांवों में गहराया संकट

कोंडागांव के ही कोंडर पंचायत के पदामपारा सहित कई गांवों का संपर्क बारिश के समय मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है। लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका कभी नक्सल प्रभाव में था, अब हालात सुधरने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

बारिश के दिनों में ग्रामीणों को खाने-पीने की चीजें लाने, बीमारों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों के स्कूल जाने में भारी मुश्किलें आती हैं। पानी में डूबे रास्तों से गुजरना जीवन को खतरे में डालने जैसा बन गया है।

हाल ही में क्षेत्रीय सांसद महेश कश्यप के प्रवास के दौरान भी ग्रामीणों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं दिख रहा।

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