रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कृषि विभाग के सत्यापन के दौरान किसानों के पलायन का बड़ा आंकड़ा सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों में जिले के 41 हजार 652 किसानों को फिलहाल पलायन की श्रेणी में रखा गया है। ये किसान सत्यापन के दौरान अपने घर या संबंधित पते पर नहीं मिले हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। जैसे-जैसे किसान मिलते जाएंगे, पलायन की श्रेणी में शामिल किसानों की संख्या घट सकती है।
दरअसल, एग्रीस्टैक में किसानों के पंजीयन के लिए कृषि विभाग द्वारा घर-घर जाकर किसानों का सत्यापन किया जा रहा है। इसी दौरान कई किसान अपने पते पर नहीं मिले। ऐसे किसानों को फिलहाल पलायन की श्रेणी में दर्ज किया गया है। विभागीय अधिकारी इन किसानों की तलाश कर रहे हैं, ताकि उनका सत्यापन पूरा कर एग्रीस्टैक में पंजीयन किया जा सके।
रायगढ़ तहसील में सबसे ज्यादा किसान नहीं मिले
आंकड़ों के मुताबिक, जिले में सबसे ज्यादा 12,045 किसान रायगढ़ तहसील में सत्यापन के दौरान नहीं मिले हैं। इसके बाद तमनार तहसील में 8,791 किसान पलायन की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। विभाग की टीमें इन किसानों के घर-घर जाकर जानकारी जुटाने में लगी हैं।
जिले में कुल 3 लाख 23 हजार 489 किसान दर्ज हैं। इनमें से अब तक 1 लाख 35 हजार 876 किसानों का एग्रीस्टैक में पंजीयन हो चुका है। वहीं 1 लाख 87 हजार 613 किसानों का पंजीयन अभी बाकी है। यानी जिले के करीब 58 फीसदी किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अभी लंबित है।
संयुक्त खातों ने बढ़ाई परेशानी
एग्रीस्टैक पंजीयन में सबसे बड़ी चुनौती संयुक्त खातों को लेकर सामने आ रही है। एक ही खाते में कई भाई-बहनों या परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज होने के कारण सत्यापन में दिक्कत हो रही है। नियम के मुताबिक, यदि किसी खाते में आठ लोगों के नाम दर्ज हैं तो सभी आठों का पंजीयन करना होगा और संबंधित खसरा विवरण भी दर्ज करना होगा।
इसके अलावा किसानों का मोबाइल नंबर भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे किसान भी सामने आ रहे हैं, जिनके पास मोबाइल फोन नहीं है। शादी के बाद दूसरे स्थान पर जा चुकी बेटियों के नाम संयुक्त खातों में दर्ज होने से भी सत्यापन और पंजीयन की प्रक्रिया जटिल हो रही है।
क्या 41 हजार किसान वास्तव में पलायन कर गए?
यह आंकड़ा अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। 41 हजार 652 किसानों का मौके पर नहीं मिलना यह साबित नहीं करता कि सभी किसान स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं। फिलहाल विभाग ने सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले किसानों को पलायन की श्रेणी में रखा है। आगे सत्यापन पूरा होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फिर भी एक ही जिले में इतनी बड़ी संख्या में किसानों का सत्यापन के दौरान नहीं मिलना खेती-किसानी, ग्रामीण रोजगार और पलायन की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है। यदि पूरे छत्तीसगढ़ में इसी तरह का विस्तृत और स्वतंत्र अध्ययन किया जाए, तो किसानों के पलायन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।





