छात्रों पर एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने का आरोप

Madhya Bharat Desk
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रांची:झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने करीब तीन साल पहले एक्सपायर हो चुके आंसू गैस के गोले भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए।

छात्रों के मुताबिक, घटनास्थल से मिले एक आंसू गैस के गोले पर निर्माण वर्ष 2019 और समाप्ति वर्ष 2022 दर्ज है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह गोला उनके पैरों के पास गिरा, लेकिन पूरी तरह नहीं फटा। इसके बावजूद आसपास के लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई। घटना में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के मामूली रूप से घायल होने की सूचना है।

छात्रों का आरोप है कि एक्सपायर हो चुके रासायनिक गोले का इस्तेमाल लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि, एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जाने जैसी बात की स्वतंत्र विशेषज्ञों से अभी पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे की जांच के लिए इस्तेमाल किए गए गोले का रासायनिक और तकनीकी परीक्षण जरूरी है।

मामले में पुलिस और प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि गोले की वैधता अवधि समाप्त होने के बावजूद उसका इस्तेमाल कैसे हुआ। छात्रों ने पूरे घटनाक्रम की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित प्रदर्शनकारियों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

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