छत्तीसगढ़ के प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म भिलाई टाइम्स के इंस्टाग्राम पेज को फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक के जरिए निशाना बनाया जाना केवल एक मीडिया संस्थान पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। यदि कोई संगठित गिरोह फर्जी दावों, ब्लैकमेलिंग और फिरौती के जरिए समाचार संस्थानों की आवाज दबाने की कोशिश करता है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।
मीडिया का काम जनता तक तथ्यात्मक और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाना है। यदि ऐसे प्लेटफॉर्म को साइबर अपराध के माध्यम से बंद कराने या डराने का प्रयास किया जाएगा, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को होगा। इससे सही सूचना का प्रवाह बाधित हो सकता है और अफवाहों व भ्रामक जानकारी को बढ़ावा मिलने का खतरा बढ़ जाता है।
यदि इस मामले में वास्तव में फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक, ब्लैकमेलिंग और फिरौती मांगने जैसी गतिविधियां हुई हैं, तो यह केवल साइबर अपराध नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या गिरोह इस तरह की हरकत करने का साहस न कर सके।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जो स्वागतयोग्य कदम है। अब आवश्यकता इस बात की है कि साइबर सेल और जांच एजेंसियां तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान कर उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा करें। यदि इस अपराध के पीछे कोई संगठित नेटवर्क या साजिश है, तो उसका भी पूरी तरह पर्दाफाश होना चाहिए।
डिजिटल युग में समाचार माध्यम लोकतंत्र की रीढ़ हैं। उन्हें डराने, ब्लैकमेल करने या झूठे कॉपीराइट दावों के जरिए बंद कराने की किसी भी कोशिश का कड़ा प्रतिरोध होना चाहिए। यह केवल एक मीडिया संस्थान का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के सूचना पाने के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रश्न है। ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ही यह संदेश दे सकती है कि कानून के सामने साइबर अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।
— संपादक: नागेंद्र पांडेय





