बालोद। डौंडीलोहारा इलाके के घने जंगलों में इन दिनों अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी का खेल तेजी से चल रहा है। तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर प्रतिबंधित और कीमती पेड़ों को निशाना बना रहे हैं और जंगलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक हर रात ट्रैक्टर, माजदा, मेटाडोर और छोटे मालवाहक वाहनों के जरिए काटी गई लकड़ियों को बाहर भेजा जा रहा है। यह लकड़ी डौंडीलोहारा से मालीघोरी, धौराभाठा होते हुए सांकरा और लाटाबोड़ की ओर ले जाई जा रही है, जहां इसे सस्ते दामों में बेचा जा रहा है।
सोमवार देर रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच ग्रामीणों ने एक संदिग्ध माजदा वाहन (सीजी 24 वी 2088) को मालीघोरी मार्ग से लाटाबोड़ की ओर जाते देखा, जिसमें प्रतिबंधित लकड़ी भरी हुई थी। बताया जा रहा है कि वाहन के आगे एक बाइक भी चल रही थी, जो पूरे नेटवर्क की निगरानी कर रही थी।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से जंगलों में संदिग्ध गतिविधियां बढ़ गई हैं। रात के समय मशीनों की आवाज और वाहनों की आवाजाही आम हो चुकी है। कई जगहों पर पेड़ों के कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई दे रहे हैं, जिससे बड़े पैमाने पर कटाई की पुष्टि हो रही है।
लोगों का आरोप है कि यह पूरा कारोबार एक संगठित गिरोह चला रहा है, जिसमें कई लोग शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जिन पेड़ों की कटाई पर रोक है, उन्हें भी लगातार काटा जा रहा है। इससे जंगल, पर्यावरण और जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। गश्त और निगरानी की कमी का फायदा उठाकर तस्कर बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं, जिससे इलाके में नाराजगी बढ़ती जा रही है।



