मध्यप्रदेश में कमर्शियल एलपीजी की किल्लत अब आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाल रही है। खासकर इंदौर जैसे शहर में, जहां हजारों छोटे-बड़े होटल, ढाबे और फूड स्टॉल रोजाना हजारों लोगों के खाने का सहारा बनते हैं, वहां हालात चिंताजनक हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि गैस की भारी कमी के चलते करीब 4 हजार से ज्यादा खाने-पीने के कारोबार प्रभावित हो चुके हैं। कई दुकानदारों के सामने ताला लगाने की नौबत आ गई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
इसी मुद्दे पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ गैस की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता का परिणाम है। अगर सरकार समय रहते आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करती, तो आज छोटे व्यापारियों को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
कमलनाथ ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार को इस संकट की पहले से जानकारी नहीं थी? अगर थी, तो तैयारी क्यों नहीं की गई? और अगर नहीं थी, तो यह सीधी लापरवाही है।
उन्होंने यह भी कहा कि छोटे दुकानदार, ठेले वाले और कैंटीन संचालक ऐसे लोग हैं, जो रोज कमाकर अपना घर चलाते हैं। उनके लिए एक दिन का काम बंद होना भी बड़ा नुकसान है। ऐसे में गैस जैसी बुनियादी जरूरत की कमी उन्हें आर्थिक संकट में धकेल रही है।
यह संकट सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। लाखों लोग जो इन दुकानों पर निर्भर हैं मजदूर, छात्र और बाहर से आए कामगार, उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।
कमलनाथ ने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत इस समस्या का समाधान करे, सप्लाई चेन को दुरुस्त करे और यह स्पष्ट करे कि आखिर चूक कहां हुई।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।


