रायपुर।छत्तीसगढ़ में ‘छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता रथ यात्रा’ को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले निकाली जा रही यह यात्रा जब तोरेसिंघा, जगदीशपुर और खपरी पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने इसका जोरदार स्वागत किया।
यात्रा के दौरान विभिन्न जगहों पर आयोजित सभाओं में राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि तुमगांव थाने में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का अपमान किया गया, जिसके विरोध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस्तीफे की मांग उठी।
इसके साथ ही जिलाधीश विनय लहंगे और अधिकारी अजय त्रिपाठी को बर्खास्त करने की मांग भी जोर-शोर से की गई। वक्ताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त हो चुकी है।
यात्रा के दौरान खल्लारी मंदिर और खल्लारी रोपवे हादसे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं की जान गई, जिसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की गई।
रथ यात्रा का नेतृत्व राज्य निर्माण संग्राम सेनानी लालाराम वर्मा के साथ बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप, मोतीराम नायक, मोहित भोई और प्रेमलाल पटेल ने किया।
सभाओं को संबोधित करते हुए लालाराम वर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र के किसानों और युवाओं ने पहले भी राज्य निर्माण और किसान आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई है और इस अभियान में भी वे पूरी ताकत के साथ शामिल होंगे।
वहीं किसान नेता मोतीराम नायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी अस्मिता और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन निर्णायक साबित होगा।
इस दौरान देवलभांठा, टेंगनापाली, केना, इच्छापुर और कुटेला सहित कई गांवों में सभाएं आयोजित की गईं, जहां बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए। लोक कलाकार लक्ष्मीनारायण निषाद समेत अन्य वक्ताओं ने भी लोगों को संबोधित किया।



