भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार क्षेत्र में ऐसी ही एक अनमोल धरोहर विद्यमान है। यह भगवान विष्णु की 2200 वर्ष पुरानी प्रतिमा है, जो वर्तमान में एक कमरे में बंद पड़ी है। इस प्रतिमा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से भी अत्यंत बड़ा है।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय शर्मा का कहना है कि यह प्रतिमा भारत में विष्णु की सबसे प्राचीन मूर्तियों में से एक है। इसकी कला शैली, नक्काशी और संरचना उस दौर की जीवनशैली और धार्मिक आस्था को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिमा गुप्तकाल से भी पहले की हो सकती है और भारतीय मूर्तिकला के विकास क्रम को समझने में अहम भूमिका निभा सकती है।
इतनी मूल्यवान धरोहर का लंबे समय से बंद कमरे में पड़ा रहना बेहद चिंताजनक है। यदि समय रहते इसका संरक्षण और उचित प्रदर्शन नहीं किया गया, तो यह धरोहर क्षति का शिकार हो सकती है। डॉ. शर्मा और स्थानीय इतिहास प्रेमियों का मानना है कि सरकार और पुरातत्व विभाग को इस प्रतिमा को संरक्षित करने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।
मल्हार की यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का माध्यम भी है। इसके संरक्षण से आने वाली पीढ़ियां भारत की प्राचीन कला और परंपरा से परिचित हो सकेंगी। इसलिए यह आवश्यक है कि इसे उचित स्थान पर प्रदर्शित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए।







