रायपुर। राजधानी रायपुर के कलेक्टर ने ग्राम पलौद, कोटनी, तादुल, पौता, बंजारी और कुरु के किसानों की जमीन की खरीदी-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस फैसले से किसानों में गुस्सा और आक्रोश तेज हो गया है।
किसानों का कहना है कि जहां वे अपनी जमीन 2 से 2.50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ में बेच सकते थे, वहीं नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने सिर्फ 30 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा तय किया है। किसानों ने इसे अन्याय बताते हुए कहा कि यह खुलेआम उनके साथ धोखा है।

भू-माफियाओं को फायदा पहुँचाने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित सड़क किसी वास्तविक सार्वजनिक जरूरत के लिए नहीं बल्कि बड़े भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही है। उनका कहना है कि भू-माफिया पहले ही इस इलाके में 200–300 एकड़ जमीन कौड़ियों के भाव खरीद चुके हैं और सड़क बनने के बाद उनकी जमीनों की कीमतें कई गुना बढ़ जाएंगी।
नवा रायपुर में प्रस्तावित 12.5 किलोमीटर लंबी और 110 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। किसानों ने इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण योजना बताते हुए विरोध तेज कर दिया है।
शासन पर मिलीभगत और घोटाले के आरोप
किसानों का कहना है कि इस योजना में शासन और अधिकारियों की मिलीभगत साफ झलकती है। उनका आरोप है कि यह ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ के जैसा बड़ा घोटाला है, जिसमें आम किसानों का हक छीनकर उनकी जमीनें सस्ते दामों पर अधिग्रहित की जा रही हैं।







