आयकर विभाग (IT), प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी चार शीर्ष एजेंसियों ने मिलकर अब तक 150 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों के खिलाफ 11 से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं।
इन मामलों में आईएएस, आईपीएस, आईटीएस, राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे), राज्य पुलिस सेवा (रापुसे) के अधिकारियों के साथ कई नामी कारोबारियों और नेताओं के नाम शामिल हैं। अब तक 50 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और 25 से ज्यादा चार्जशीट या परिवाद अदालतों में पेश किए जा चुके हैं। लेकिन किसी भी मामले में अभी तक अंतिम चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी है क्योंकि जांच अभी भी जारी है।
कब और कैसे शुरू हुई जांच:
इस घोटाले की जड़ें फरवरी 2020 में पड़ीं, जब आयकर विभाग ने राज्य में पहली बार छापा मारा। इसके बाद एक-एक कर सभी केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हुईं। IT विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की और FIR दर्ज की गई।
इसके बाद EOW और CBI ने भी अलग-अलग मामलों में अपनी जांचें शुरू कीं। जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया और अब यह राज्य के प्रशासनिक ढांचे के हर स्तर तक जा पहुंचा है।
चार्जशीट का पूरा विवरण:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक शराब घोटाले में 4, कोयला परिवहन में 4, महादेव सट्टा एप केस में 3, डीएमएफ घोटाले में 2 और कस्टम मिलिंग मामले में 1 परिवाद अदालत में दाखिल किया है।
EOW ने शराब घोटाले में 5, कोयला परिवहन में 2, डीएमएफ व कस्टम मिलिंग में 1-1, तेंदूपत्ता बोनस में 1 और भारतमाला मुआवजा घोटाले में 1 चार्जशीट पेश की है।
CBI ने फिलहाल PSC भर्ती गड़बड़ी में एक चार्जशीट दायर की है जबकि महादेव सट्टा एप केस में जांच जारी है।
जिन प्रमुख लोगों पर जांच चल रही है:
नेता: कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, देवेंद्र यादव, चंद्रदेव राय, आरपी सिंह, रामगोपाल अग्रवाल और विनोद तिवारी जैसे राजनेताओं के नाम शामिल हैं।
आईएएस अफसर: रानू साहू, समीर विश्नोई, जयप्रकाश मौर्य, अनिल टुटेजा, टामन सिंह सोनवानी, विवेक ढांढ और निरंजन दास।
आईटीएस अधिकारी: अरुणपति त्रिपाठी, मनोज सोनी।
आईपीएस अधिकारी: आनंद छाबड़ा, शेख आरिफ, प्रशांत अग्रवाल, अभिषेक पल्लव।
राप्रसे/रापुसे अधिकारी: सौम्या चौरसिया, माया वारियर, निर्भय साहू, ललित गणवीर, आरती वासनिक, अभिषेक माहेश्वरी, संजय ध्रुव।
वन, आबकारी और पुलिस अधिकारी: अशोक पटेल, राजशेखर पुराणिक, सीबी वर्मा, अर्जुन यादव, जर्नादन कौरव, नीतू नोतानी, दिनकर वासनिक, सौरभ बख्शी, समेत दर्जनों अफसरों के नाम सामने आए हैं।
व्यापारी: सूर्यकांत तिवारी, अनवर ढेबर, सुनील अग्रवाल, रवि उप्पल, अमित अग्रवाल, पप्पू बंसल, सौरभ चंद्राकार, त्रिलोक सिंह ढिल्लन समेत कई व्यवसायिक नाम भी जांच के घेरे में हैं।
प्रमुख जांच बिंदु और संबंधित व्यक्ति:
- रानू साहू (IAS): डीएमएफ, कस्टम मिलिंग, अवैध कोल ट्रांसपोर्ट—ED और EOW की संयुक्त जांच
- अनिल टुटेजा (रिटायर्ड IAS): शराब घोटाले और नान घोटाले में कई एजेंसियों की अलग-अलग जांच
- अरुणपति त्रिपाठी (ITS): शराब घोटाले में ईडी, ईओडब्ल्यू और झारखंड एसीबी की जांच
- सौम्या चौरसिया: अवैध कोल परिवहन, डीएमएफ और आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच
- अनवर ढेबर और सूर्यकांत तिवारी: शराब घोटाले में मल्टी-एजेंसी जांच का सामना कर रहे हैं
छत्तीसगढ़ में यह जांच अभियान राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में उभरा है। जहां एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियों ने सख्त रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया अभी लंबी है।
अब सवाल उठता है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी दोषियों को कब तक सजा मिलेगी? और क्या यह मामले केवल राजनीतिक हथियार बनकर रह जाएंगे या सच्चाई तक पहुंचेगा न्याय?



