कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्य सचेतक शंकर घोष समेत चार भाजपा विधायकों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। इन पर अध्यक्ष के निर्देशों की अवहेलना करने, कागजात फाड़ने और माइक तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या है मामला?
भाजपा विधायकों की नाराजगी उस समय शुरू हुई जब बीते गुरुवार को विधायक अशोक लाहिरी और अन्य भाजपा नेताओं की टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाया गया। इसी के विरोध में सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायकों ने मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के भाषण में लगातार बाधा डाली।
आदेश न मानने पर निलंबन
विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों को कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हंगामा जारी रखा। इसके बाद अध्यक्ष ने शंकर घोष, अग्निमित्रा पॉल, दीपक बर्मन और मनोज उरांव को पूरे सत्र से निलंबित करने का फैसला लिया।
सदन में झड़प और वॉकआउट
हंगामे के दौरान अग्निमित्रा पॉल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विधायक असीमा पात्रा के बीच तीखी बहस हो गई। बाद में विधानसभा के सुरक्षा कर्मियों ने चारों भाजपा विधायकों को बाहर किया। इस घटना के बाद अन्य भाजपा विधायकों ने भी सदन से वॉकआउट कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी का आरोप
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा में तैनात TMC समर्थित सुरक्षाकर्मियों ने भाजपा विधायकों से धक्का-मुक्की और मारपीट की। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक शंकर घोष का चश्मा टूट गया और उनके निजी सामान को नुकसान पहुंचा। शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि आगामी सत्र में विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।
अध्यक्ष का बयान
विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने बताया कि इस हंगामे में 14 सुरक्षा कर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हंगामे में विधानसभा की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई निलंबित विधायकों की सैलरी से की जाएगी। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।



