केंद्र सरकार घरेलू विमान यात्रियों से जुड़े एक अहम फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, घरेलू उड़ानों पर लागू हवाई किराया सीमा (एयरफेयर कैप) को जल्द हटाया जा सकता है। यह कैप हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस में आई तकनीकी और परिचालन समस्याओं के बाद लागू किया गया था।
दरअसल, उस दौरान बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द और विलंबित हो रही थीं। इसका सीधा असर टिकट कीमतों पर पड़ा और कई रूट्स पर किराया अचानक आसमान छूने लगा। यात्रियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए अस्थायी तौर पर किराया सीमा तय की थी।
सरकार का उद्देश्य साफ था—एयरलाइंस द्वारा मनमाने और अत्यधिक किराए वसूलने पर रोक लगाना। इसके तहत यात्रा दूरी के हिसाब से अधिकतम टिकट दरें निर्धारित की गई थीं, ताकि छोटे और लंबे रूट्स दोनों पर संतुलन बना रहे और यात्रियों को राहत मिल सके।
नए साल और त्योहारों के सीजन के दौरान यह व्यवस्था यात्रियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई। किराया नियंत्रण के चलते एयरलाइंस टिकट के दाम मनमर्जी से नहीं बढ़ा सकीं और यात्रियों को किफायती दरों पर सफर का मौका मिला।
हालांकि अब हालात सामान्य होने का दावा किया जा रहा है। एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि परिचालन व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। इसी आधार पर केंद्र सरकार किराया कैप हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
फिर भी, सरकार पूरी तरह निगरानी खत्म करने के मूड में नहीं है। कैप हटने के बाद भी एयरलाइंस को हर 15 दिन में टिकट कीमतों से जुड़ा विस्तृत डेटा सरकार को सौंपना अनिवार्य होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी रूट पर किराए में अचानक या असामान्य बढ़ोतरी न हो।
सूत्रों का कहना है कि यात्रियों के हित सरकार की प्राथमिकता बने रहेंगे। यदि किसी रूट पर टिकट के दाम अनुचित तरीके से बढ़ाए जाते हैं, तो सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर सकती है। निगरानी तंत्र के जरिए पारदर्शिता बनाए रखने और यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़ने देने की कोशिश जारी रहेगी।







