छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला, जिसे राज्य की “ऊर्जा राजधानी” कहा जाता है, पिछले कई वर्षों से फ्लाई ऐश प्रदूषण और सड़कों की जर्जर स्थिति जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। कोरबा क्षेत्र में मौजूद थर्मल पावर प्लांट्स और कोयला खदानों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) का उचित निपटान न होने के कारण स्थानीय पर्यावरण और जनजीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। उड़ती राख और टूटी सड़कों से न केवल आवागमन में कठिनाई होती है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन गई है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए इस विषय पर जनहित याचिका दायर की गई, जिस पर बुधवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई की। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि “सिर्फ अस्थायी मरम्मत से जनता को राहत नहीं मिल सकती।” अदालत ने कहा कि सड़क निर्माण और फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान तैयार करना अनिवार्य है ताकि लोगों को दीर्घकालिक राहत मिल सके।
न्यायालय ने NTPC, SECL और BALCO जैसी प्रमुख औद्योगिक कंपनियों को फटकार लगाते हुए पूछा कि अब तक उन्होंने इस दिशा में कितनी कार्रवाई की है और क्यों उनके प्रयास केवल अस्थायी उपायों तक सीमित रहे हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर सड़क निर्माण और फ्लाई ऐश प्रबंधन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
इसके साथ ही, BALCO और NTPC के सीएमडी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कंपनियाँ समस्या के समाधान के लिए कौन-से ठोस कदम उठा रही हैं। नगर निगम कोरबा को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है ताकि स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी स्पष्ट की जा सके।
अदालत ने कहा कि कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में जनता का जीवन और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस विषय पर अगली सुनवाई 14 नवंबर को निर्धारित की गई है, जहाँ यह अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित संस्थान स्थायी समाधान की दिशा में ठोस योजना प्रस्तुत करेंगे।



