रायपुर।छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को सितंबर माह में महंगाई का डबल झटका लगा है। प्रदेशभर के करीब 65 लाख उपभोक्ताओं के बिजली बिल में इस बार 7.10 फीसदी एफपीपीएएस शुल्क (Fuel Power Purchase Adjustment Surcharge) जोड़ा गया है। इसके साथ ही बिजली बिल हॉफ योजना की सीमा 400 यूनिट से घटाकर सिर्फ 100 यूनिट कर दी गई है।
400 यूनिट पर अब 1000 रुपये ज्यादा
पिछले छह सालों से उपभोक्ता 400 यूनिट तक आधा बिल भर रहे थे। इसमें ऊर्जा प्रभार और एफपीपीएएस शुल्क भी आधा ही लिया जाता था। लेकिन अगस्त से इस योजना में बदलाव कर दिया गया है। अब 400 यूनिट की खपत पर उपभोक्ताओं को करीब 1000 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। जिनका बिल पहले 600 रुपये आता था, उनका बिल अब 1200 रुपये और 1200 रुपये वालों का करीब 2400 रुपये आ रहा है।
क्यों बढ़ा बिल?
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बिजली उत्पादन लागत और खरीदी गई बिजली के अंतर की राशि उपभोक्ताओं से वसूली जा रही है। इसी फार्मूले को एफपीपीएएस कहा जाता है।
- अप्रैल 2023 में पहली बार यह फॉर्मूला लागू किया गया था।
- मई 2025 में एफपीपीएएस शुल्क 7.32% लगा।
- जून में यह -0.12% और जुलाई में -1.44% रहा, जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली।
- लेकिन सितंबर के बिल में यह फिर से 7.10% हो गया, जिससे उपभोक्ताओं पर बड़ा बोझ बढ़ गया है।
उपभोक्ताओं में आक्रोश
इस बार बिल डबल आने से आम उपभोक्ता परेशान हैं। उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई का बोझ झेल रहे हैं और अब बिजली बिल ने परिवार के बजट को बिगाड़ दिया है।







