कुम्हारी, छत्तीसगढ़। सरस्वती शिशु मंदिर कुम्हारी में इस बार पोला पर्व को बच्चों ने पारंपरिक उत्साह और खेलकूद गतिविधियों के साथ मनाया। विद्यालय द्वारा किए गए इस प्रयास का उद्देश्य बच्चों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना था।
इस अवसर पर बच्चों ने बैलों और पोला को सजाया। साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे बच्चों को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के महत्व को समझने और आत्मसात करने का अवसर मिला। विद्यालय का यह आयोजन बच्चों के लिए न केवल मनोरंजन का साधन रहा, बल्कि शिक्षा और संस्कृति का संगम भी साबित हुआ।

पोला पर्व छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक त्योहारों में से एक है। यह मुख्य रूप से किसानों और पशुपालकों का त्योहार है, जिसमें बैलों की पूजा कर कृषि संस्कृति का सम्मान किया जाता है। गांवों में बच्चे मिट्टी से बने छोटे-छोटे पोला लेकर खेलते हैं और इसे उत्सव की तरह मनाते हैं। इसी परंपरा को विद्यालय में जीवंत करने का प्रयास किया गया।

शिक्षकों का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन से बच्चों में अपनी जड़ों के प्रति लगाव पैदा होता है और वे समझ पाते हैं कि त्यौहार केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि हमारी धरोहर और जीवनशैली से गहराई से जुड़े हैं। बच्चों के बीच इस उत्सव ने यह संदेश भी दिया कि हमारी संस्कृति को बचाना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के आयोजन हर स्कूल में होने चाहिए, ताकि बच्चे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी परंपराओं और लोकसंस्कृति से भी जुड़े रहें।







