भारत में एशियाई शेरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने विश्व शेर दिवस के अवसर पर 16वीं शेर जनसंख्या रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में देश में इन शेरों की संख्या में 32% का इजाफा हुआ है। 2020 में 674 शेर थे, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 891 हो गया है।
अमरेली में सबसे ज्यादा शेर
रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के अमरेली जिले में सबसे ज्यादा एशियाई शेर पाए जाते हैं। यहां 82 व्यस्क नर, 117 व्यस्क मादा और 79 शावक मौजूद हैं। मितियाला वाइल्डलाइफ सेंचुरी में शेरों की संख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज हुई है, इसके बाद भावनगर मेनलैंड और दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्र आते हैं।
नई खोज और कॉरिडोर में पहली बार गिनती
रिपोर्ट में पहली बार यह भी सामने आया कि कॉरिडोर इलाकों में 22 एशियाई शेर पाए गए हैं। इनकी गिनती सैटेलाइट तकनीक की मदद से की गई। कुल मिलाकर, नौ क्षेत्रों — जैसे बारदा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, जेतपुर, बाबरा जसदान और आसपास के इलाकों — में 497 शेरों का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
सरकार का बयान और संरक्षण का संकल्प
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “भारत को एशियाई शेरों का घर होने पर गर्व है। पिछले एक दशक में इनकी संख्या में 70% से अधिक वृद्धि हुई है। 2015 में जहां 523 शेर थे, वहीं 2025 में यह बढ़कर 891 हो गए हैं। वर्ल्ड लायन डे पर हम इनके संरक्षण का प्रण लेते हैं।”
कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ स्थानों — जैसे गिरनार वाइल्डलाइफ सेंचुरी और भावनगर तटीय क्षेत्र — में शेरों की संख्या में हल्की गिरावट आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संरक्षण कार्य लगातार मजबूत करने की आवश्यकता है।



