देश के गृहमंत्री अमित शाह का राजनीतिक और प्रशासनिक शैली में एक अलग ही प्रभाव है। आत्मविश्वास से भरपूर और स्पष्ट विचारधारा के धनी श्री शाह की कार्यशैली में दृढ़ निश्चय और सटीक योजना झलकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे विश्वस्त और प्रभावशाली सहयोगियों में गिने जाने वाले अमित शाह जब कोई वादा करते हैं, तो उसे पूरा करने की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से नजर आती है।
लगभग दस महीने पूर्व गृहमंत्री ने यह दावा किया था कि देश जल्द ही नक्सलवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त होगा। उस समय यह बात कुछ लोगों को आशावादी या राजनीतिक प्रतीत हो सकती थी, लेकिन आज जमीनी स्तर पर तेजी से बदलते हालात उनके उस विश्वास की पुष्टि कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई, खुफिया तंत्र की मजबूती, और स्थानीय लोगों के सहयोग से नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अब सरकार की पकड़ मजबूत होती जा रही है। मुठभेड़ों में शीर्ष नक्सली नेताओं का मारा जाना और बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सरकार की नीति अब प्रभावी साबित हो रही है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास भी गति पकड़ चुका है। यह रणनीति केवल सैन्य दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक मोर्चे पर भी काम हो रहा है।
इस प्रकार, अमित शाह द्वारा दस माह पहले किया गया नक्सल उन्मूलन का दावा अब केवल भाषण नहीं, बल्कि नीति, रणनीति और जमीनी स्तर पर दिखते परिणामों का उदाहरण बनता जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति सशक्त हो तो देश की सबसे गंभीर चुनौतियों का समाधान भी संभव है।



