शिक्षकों को कुत्तों की पहचान और सुरक्षा पर ट्रेनिंग दी जाए: पूर्व विधायक विकास उपाध्याय की मांग

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नया आदेश इस समय तीखी बहस का मुद्दा बना हुआ है। विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि स्कूल परिसर और उसके आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों की निगरानी की जाए। इसके लिए शिक्षकों को कुत्तों की संख्या, रंग, नस्ल, व्यवहार और खतरे की स्थिति जैसी जानकारियाँ पंचायत या नगर निगम के डॉग कैचर तक पहुंचानी होंगी। हर स्कूल में इस काम के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त करने का आदेश दिया गया है।

सरकार का तर्क है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और आवारा कुत्तों के चलते कई बार दुर्घटना या हमले की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए समय रहते निगरानी जरूरी है। लेकिन इस निर्णय ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस आदेश को ‘शिक्षकों का अपमान’ बताया और मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शिक्षक पढ़ाने के लिए होते हैं, न कि कुत्तों की पहचान और रिपोर्ट बनाने के लिए। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि यदि सरकार को शिक्षकों से इतनी विस्तृत जानकारी चाहिए, तो पहले उन्हें “डॉग ट्रेनिंग वर्कशॉप” करानी चाहिए, जिसमें कुत्तों के व्यवहार, खतरे की स्थिति में सावधानी तथा पहचान के तरीके बताए जाएँ।

विकास उपाध्याय ने यह भी कहा कि यदि सरकार इस विषय पर प्रशिक्षण देने में विफल रहती है, तो कांग्रेस स्वयं शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगी। उनका मानना है कि शिक्षा विभाग को शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालने की बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए तथा पशु नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों को ही देनी चाहिए।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment